Thursday, August 21, 2008

जमैका की फर्राटा दौड़ों में क्लीन स्वीप

बीजिंग। वेरोनिका केंपबेल ब्राउन के बृहस्पतिवार को महिला 200 मी. दौड़ का स्वर्ण जीतने के साथ ही जमैका ने बीजिंग ओलंपिक में एथलेटिक्स की सभी चार फर्राटा दौड़ों की क्लीन स्वीप कर ली जबकि अमेरिका की पुरुष और महिला चार गुणा 100 मीटर रिले टीम को बेटन गिराने के कारण क्वालीफाइंग दौर से ही बाहर कर दिया गया। वहीं चीन [46] ने ओलंपिक में स्वर्ण पदकों के मामले में अमेरिका [29] से लगभग दोगुने की बढ़त बना ली है। ब्रिटेन आश्चर्यजनक ढंग से 17 स्वर्ण पदकों के साथ तीसरे स्थान पर बना हुआ है। रूस और आस्ट्रेलिया क्रमश: चौथे व पांचवें स्थान पर है।


ब‌र्ड्स नेस्ट स्टेडियम में क्यूबा के डेरोन रॉबल्स ने 110 मीटर बाधा दौड़ का स्वर्ण पदक 12.93 सेकंड में जीता जबकि चेक गणराज्य की बारबोरा स्पोताकोवा ने महिला भाला फेंक का स्वर्ण अपने नाम किया। पुर्तगाल के नेल्सन इवोरा ने तिहरी कूद का स्वर्ण जीता। जमैका की ब्राउन ने दो सौ मीटर रेस में तूफानी गति निकालते हुए 21.74 सेकंड का समय लेकर अपने कैरियर का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया और लगातार दूसरे ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीत लिया। उन्होंने अमेरिका की एलिसन फेलिक्स को दूसरे स्थान पर छोड़ दिया। पुरुष और महिला चार गुणा 100 मीटर रिले में बेटन गिराने के कारण अमेरिका की टीम को अयोग्य करार दी गई और फाइनल के लिए क्वालीफाई नहीं कर पाई। फर्राटा दौड़ों में जमैका की पुरुष और महिला टीमों ने आसानी से अपनी हीट जीतकर फाइनल में जगह बनाई। अमेरिका के लिए एक अच्छी खबर यह रही कि उसके धावक लाशान मेरिट ने हमवतन और गत चैंपियन जैरिमी वारिनर को हराकर 43.75 सेकंड के समय के साथ 400 मी. दौड़ का स्वर्ण जीत लिया। वारिनर 44.65 सेकंड के साथ दूसरे और उनके हमवतन डेविड नेविले तीसरे स्थान पर रहे। 1988 के सियोल ओलंपिक में कनाडा के बेन जानसन को अयोग्य करार दिए जाने के बाद उस ओलंपिक में अमेरिका ने चारों फर्राटा स्वर्ण जीते थे। उसके बाद से अब जाकर जमैका ने सभी फर्राटा दौड़ों को क्लीन स्वीप किया है। अमेरिका के लिए 1980 के मास्को ओलंपिक के बहिष्कार के बाद यह पहला मौका है जब वह कोई फर्राटा दौड़ नहीं जीत पाया है। चेक गणराज्य की स्पोताकोवा ने 71.42 मीटर की दूरी तक भाला फेंक कर स्वर्ण पदक जीता।


महिला फुटबाल में अमेरिका ने ब्राजील से छीना सोना
बीजिंग। अमेरिका ने ओलंपिक खेलों में महिला फुटबाल प्रतियोगिता का स्वर्ण पदक जीत लिया है। अमेरिका ने स्वर्ण पदक के लिए खेले गए मुकाबले में ब्राजील को 1-0 से पराजित किया। दोनों टीमें निर्धारित समय तक गोलरहित बराबरी पर थीं। लेकिन अतिरिक्त समय में अमेरिका ने विजयी गोल दागकर स्वर्ण अपने नाम कर लिया। इससे पूर्व विश्व चैंपियन जर्मनी ने जापान को 2-0 से हराकर कांस्य पदक जीता।


साफ्टबाल में जापान ने तोड़ा अमेरिका का बर्चस्व
बीजिंग। अमेरिका की साफ्टबाल टीम ने 2000 के बाद पहली बार हार का सामना करते हुए ओलंपिक खेलों में अपना लगातार चौथा स्वर्ण पदक जीतने से वंचित हो गई। अमेरिकी टीम को जापान ने 1-3 से हरा दिया। जापान के यूकिको यूनो ने शानदार प्रदर्शन कर सिडनी ओलंपिक में 21 सितंबर 2000 के बाद पहली बार अमेरिकियों को हार झेलने पर विवश कर दिया। तब से लेकर अमेरिका ने लगातार 22 जीत दर्ज की है।


कुश्ती में रूस ने अपने नाम किया छह स्वर्ण
बीजिंग। रूस के एस मुरादोव ने ओलंपिक की कुश्ती प्रतियोगिता में अपने देश के लिए छठा स्वर्ण पदक जीता। मुरादोव ने 96 किलो फ्रीस्टाइल वर्ग खिताब जीत कर अपने देश को कुश्ती पावरहाउस साबित किया। यूरोपीय चैंपियन 23 वर्षीय मुरादोव ने फाइनल में कजाकिस्तान के ताइमुराज तिजिव को हराया। रूस ने इस बार ओलंपिक की कुश्ती प्रतियोगिता में तीन फ्रीस्टाइल और तीन ग्रीको रोमन कुल मिलाकर छह स्वर्ण पदक जीते। रूसी पहलवानों को सांतवा स्वर्ण पदक जीतने का सपना उस समय चूर हो गया जब 120 किलो भार वर्ग में पूर्व जूनियर विश्व चैंपियन बख्तियार ऐखमेदेव को पिछले ओलंपिक चैंपियन उजबेकिस्तान के अर्थर तेमाजोव ने हरा दिया। जार्जिया के रेवाजी माइंडोराशविली ने सेमीफाइनल में स्वर्ण के प्रबल दावेदार रूसी खिलाड़ी को हराने के बाद ओलंपिक कुश्ती के 84 किग्रा फ्रीस्टाइल के फाइनल में भी अपना जलवा दिखाकर सोने का तमगा हासिल किया।


कैंसर को मात दे वीज्डेन ने जीता सोना
बीजिंग। सात साल पहले ल्यूकेमिया कैंसर से ग्रस्त घोषित कर दिए जाने वाले हालैंड के तैराक मार्टेन वान डेर वीज्डेन ने ओलंपिक की मैराथन तैराकी स्पर्धा का स्वर्ण जीतकर मानवीय जिजीविषा की विजय का शानदार उदाहरण पेश किया। वीज्डेन ने खुले पानी में 10 किलोमीटर की दूरी लगभग दो घंटे में तय करते हुए बेहद नजदीकी अंतर से स्वर्ण पदक पर कब्जा किया। इस स्पर्धा को ओलंपिक में पहली बार शामिल किया गया है। वीज्डेन की यह जीत यह देखते हुए करिश्माई लगती है कि उन्हें सात वर्ष पहले डाक्टरों ने कैंसर से पीड़ित घोषित कर दिया था। डाक्टरों का कहना था कि ल्यूकेमिया कैंसर से पीड़ित वीज्डेन के जिंदा रहने की उम्मीद भी बहुत कम है। लेकिन वीज्डेन ने हार नहीं मानी और अपनी जिंदगी पर आए इस संकट का पूरी शिद्दत और साहस के साथ सामना किया। वह न केवल इस कैंसर को मात देने में सफल रहे बल्कि उन्होंने तैराकी की सर्वाधिक मुश्किल स्पर्धा को जीतकर अपनी जिंदगी का जश्न भी मनाया।


बीच वालीबाल में चीन ने खाता खोला
बीजिंग। चेन झुई और च्यांग झी ने ब्राजील की रेनाटा रिबेरो और तालिता रोचा को 21-19, 21-17 से हराकर चीन को बीच वालीबाल में पहली बार ओलंपिक पदक दिलाया। चेन और च्यांग ने 7600 दर्शकों के सामने अपने देश के लिए कांस्य पदक जीता। चीन की तियान जिया और वांग जी फाइनल में अमेरिका की केरी वाल्श और मिस्टी मे से भिड़ेगी। अमेरिकी जोड़ी ने अब तक लगातार 107 मैच जीते हैं।

जमैका की फर्राटा दौड़ों में क्लीन स्वीप

बीजिंग। वेरोनिका केंपबेल ब्राउन के बृहस्पतिवार को महिला 200 मी. दौड़ का स्वर्ण जीतने के साथ ही जमैका ने बीजिंग ओलंपिक में एथलेटिक्स की सभी चार फर्राटा दौड़ों की क्लीन स्वीप कर ली जबकि अमेरिका की पुरुष और महिला चार गुणा 100 मीटर रिले टीम को बेटन गिराने के कारण क्वालीफाइंग दौर से ही बाहर कर दिया गया। वहीं चीन [46] ने ओलंपिक में स्वर्ण पदकों के मामले में अमेरिका [29] से लगभग दोगुने की बढ़त बना ली है। ब्रिटेन आश्चर्यजनक ढंग से 17 स्वर्ण पदकों के साथ तीसरे स्थान पर बना हुआ है। रूस और आस्ट्रेलिया क्रमश: चौथे व पांचवें स्थान पर है।

ब‌र्ड्स नेस्ट स्टेडियम में क्यूबा के डेरोन रॉबल्स ने 110 मीटर बाधा दौड़ का स्वर्ण पदक 12.93 सेकंड में जीता जबकि चेक गणराज्य की बारबोरा स्पोताकोवा ने महिला भाला फेंक का स्वर्ण अपने नाम किया। पुर्तगाल के नेल्सन इवोरा ने तिहरी कूद का स्वर्ण जीता। जमैका की ब्राउन ने दो सौ मीटर रेस में तूफानी गति निकालते हुए 21.74 सेकंड का समय लेकर अपने कैरियर का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया और लगातार दूसरे ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीत लिया। उन्होंने अमेरिका की एलिसन फेलिक्स को दूसरे स्थान पर छोड़ दिया। पुरुष और महिला चार गुणा 100 मीटर रिले में बेटन गिराने के कारण अमेरिका की टीम को अयोग्य करार दी गई और फाइनल के लिए क्वालीफाई नहीं कर पाई। फर्राटा दौड़ों में जमैका की पुरुष और महिला टीमों ने आसानी से अपनी हीट जीतकर फाइनल में जगह बनाई। अमेरिका के लिए एक अच्छी खबर यह रही कि उसके धावक लाशान मेरिट ने हमवतन और गत चैंपियन जैरिमी वारिनर को हराकर 43.75 सेकंड के समय के साथ 400 मी. दौड़ का स्वर्ण जीत लिया। वारिनर 44.65 सेकंड के साथ दूसरे और उनके हमवतन डेविड नेविले तीसरे स्थान पर रहे। 1988 के सियोल ओलंपिक में कनाडा के बेन जानसन को अयोग्य करार दिए जाने के बाद उस ओलंपिक में अमेरिका ने चारों फर्राटा स्वर्ण जीते थे। उसके बाद से अब जाकर जमैका ने सभी फर्राटा दौड़ों को क्लीन स्वीप किया है। अमेरिका के लिए 1980 के मास्को ओलंपिक के बहिष्कार के बाद यह पहला मौका है जब वह कोई फर्राटा दौड़ नहीं जीत पाया है। चेक गणराज्य की स्पोताकोवा ने 71.42 मीटर की दूरी तक भाला फेंक कर स्वर्ण पदक जीता।

महिला फुटबाल में अमेरिका ने ब्राजील से छीना सोना
बीजिंग। अमेरिका ने ओलंपिक खेलों में महिला फुटबाल प्रतियोगिता का स्वर्ण पदक जीत लिया है। अमेरिका ने स्वर्ण पदक के लिए खेले गए मुकाबले में ब्राजील को 1-0 से पराजित किया। दोनों टीमें निर्धारित समय तक गोलरहित बराबरी पर थीं। लेकिन अतिरिक्त समय में अमेरिका ने विजयी गोल दागकर स्वर्ण अपने नाम कर लिया। इससे पूर्व विश्व चैंपियन जर्मनी ने जापान को 2-0 से हराकर कांस्य पदक जीता।

साफ्टबाल में जापान ने तोड़ा अमेरिका का बर्चस्व
बीजिंग। अमेरिका की साफ्टबाल टीम ने 2000 के बाद पहली बार हार का सामना करते हुए ओलंपिक खेलों में अपना लगातार चौथा स्वर्ण पदक जीतने से वंचित हो गई। अमेरिकी टीम को जापान ने 1-3 से हरा दिया। जापान के यूकिको यूनो ने शानदार प्रदर्शन कर सिडनी ओलंपिक में 21 सितंबर 2000 के बाद पहली बार अमेरिकियों को हार झेलने पर विवश कर दिया। तब से लेकर अमेरिका ने लगातार 22 जीत दर्ज की है।

कुश्ती में रूस ने अपने नाम किया छह स्वर्ण
बीजिंग। रूस के एस मुरादोव ने ओलंपिक की कुश्ती प्रतियोगिता में अपने देश के लिए छठा स्वर्ण पदक जीता। मुरादोव ने 96 किलो फ्रीस्टाइल वर्ग खिताब जीत कर अपने देश को कुश्ती पावरहाउस साबित किया। यूरोपीय चैंपियन 23 वर्षीय मुरादोव ने फाइनल में कजाकिस्तान के ताइमुराज तिजिव को हराया। रूस ने इस बार ओलंपिक की कुश्ती प्रतियोगिता में तीन फ्रीस्टाइल और तीन ग्रीको रोमन कुल मिलाकर छह स्वर्ण पदक जीते। रूसी पहलवानों को सांतवा स्वर्ण पदक जीतने का सपना उस समय चूर हो गया जब 120 किलो भार वर्ग में पूर्व जूनियर विश्व चैंपियन बख्तियार ऐखमेदेव को पिछले ओलंपिक चैंपियन उजबेकिस्तान के अर्थर तेमाजोव ने हरा दिया। जार्जिया के रेवाजी माइंडोराशविली ने सेमीफाइनल में स्वर्ण के प्रबल दावेदार रूसी खिलाड़ी को हराने के बाद ओलंपिक कुश्ती के 84 किग्रा फ्रीस्टाइल के फाइनल में भी अपना जलवा दिखाकर सोने का तमगा हासिल किया।

कैंसर को मात दे वीज्डेन ने जीता सोना
बीजिंग। सात साल पहले ल्यूकेमिया कैंसर से ग्रस्त घोषित कर दिए जाने वाले हालैंड के तैराक मार्टेन वान डेर वीज्डेन ने ओलंपिक की मैराथन तैराकी स्पर्धा का स्वर्ण जीतकर मानवीय जिजीविषा की विजय का शानदार उदाहरण पेश किया। वीज्डेन ने खुले पानी में 10 किलोमीटर की दूरी लगभग दो घंटे में तय करते हुए बेहद नजदीकी अंतर से स्वर्ण पदक पर कब्जा किया। इस स्पर्धा को ओलंपिक में पहली बार शामिल किया गया है। वीज्डेन की यह जीत यह देखते हुए करिश्माई लगती है कि उन्हें सात वर्ष पहले डाक्टरों ने कैंसर से पीड़ित घोषित कर दिया था। डाक्टरों का कहना था कि ल्यूकेमिया कैंसर से पीड़ित वीज्डेन के जिंदा रहने की उम्मीद भी बहुत कम है। लेकिन वीज्डेन ने हार नहीं मानी और अपनी जिंदगी पर आए इस संकट का पूरी शिद्दत और साहस के साथ सामना किया। वह न केवल इस कैंसर को मात देने में सफल रहे बल्कि उन्होंने तैराकी की सर्वाधिक मुश्किल स्पर्धा को जीतकर अपनी जिंदगी का जश्न भी मनाया।

बीच वालीबाल में चीन ने खाता खोला
बीजिंग। चेन झुई और च्यांग झी ने ब्राजील की रेनाटा रिबेरो और तालिता रोचा को 21-19, 21-17 से हराकर चीन को बीच वालीबाल में पहली बार ओलंपिक पदक दिलाया। चेन और च्यांग ने 7600 दर्शकों के सामने अपने देश के लिए कांस्य पदक जीता। चीन की तियान जिया और वांग जी फाइनल में अमेरिका की केरी वाल्श और मिस्टी मे से भिड़ेगी। अमेरिकी जोड़ी ने अब तक लगातार 107 मैच जीते हैं।

भारतीय ओलंपिक अभियान को लगे पंख

बीजिंग। भारत के लिए ओलंपिक में ऐतिहासिक रहे बीस अगस्त के दिन पहलवान सुशील कुमार ने जहां कांस्य पदक हासिल किया, वहीं मुक्केबाज विजेंदर कुमार ने अपने लिए कम से कम कांसे का तमगा सुनिश्चित करके देश के नाम पर रिकार्ड तीन पदक भी पक्के किए। इन दो और पदकों के भारत की झोली में आने से भारतीय ओलंपिक अभियान को सही मायनों में पंख लग गए हैं।
अभिनव बिंद्रा के पहले सप्ताह में स्वर्ण पदक जीतने के बाद 25 वर्षीय सुशील कुमार कुश्ती में कांस्य पदक जीतकर अचानक सुर्खियों में छा गए जबकि विजेंदर ने भारतीय खेलों के लिए ऐतिहासिक दिन में एक और स्वर्ण पदक की आस जगा दी।
सुशील और विजेंदर ने बीजिंग ओलंपिक खेलों में भारतीय खिलाडि़यों में एक के बाद एक स्पर्धाओं में बाहर होते जाने आ रही निराशा को आज उत्साह में बदल दिया। भारत के लिए कुश्ती स्पर्धा में 56 साल पहले 1952 के हेलसिंकी ओलंपिक में केडी जाधव ने जीता था। इसके बाद सुशील कुमार यह उपलब्धि हासिल करने वाले दूसरे पहलवान बन गए। सुशील और विजेंदर ने जहां देश को गौरवान्वित किया वहीं पदक के एक अन्य दावेदार जितेंदर कुमार अच्छे प्रयासों के बावजूद क्वार्टर फाइनल में हार गए।
बीजिंग ओलंपिक में सुशील कुमार द्वारा 56 वर्ष बाद लाया गया कांस्य पदक एक बार फिर से देश में पहलवानी का युग वापस लाने में सहायक होगा। यह कहना है पूर्व ओलंपियन प्रेमनाथ सोनकर, एसएस दहिया व रोशन लाल का। प्रेमनाथ पहलवान ने सुशील को बधाई देते हुए कहा कि जहां इस खेल को लोग बुरी नजर से देखने लगे थे, पर आज उस पर विराम लग गया। उन्होंने कहा कि देश में आज क्रिकेट को ही पूजा जाता है। प्रेमनाथ ने कहा कि आज हर कोई अपने बच्चों को क्रिकेटर बनाना चाहता है। ओलंपिक में अभिनव बिंद्रा ने स्वर्ण व सुशील ने कांस्य पदक जीतकर इस फिजा को बदलने में कारगर साबित हो सकते हैं। सुशील ने जिस तरह विपक्षी पहलवान को हराया है। इससे वह कोई जिगर वाला पहलवान ही लगता है। उसने अपने जिदारी दांव खेलकर जीत को अपने पक्ष में किया।
प्रेमनाथ ने कहा कि सुशील के पदक से पहलवानी के प्रति एक अलग माहौल पैदा होगा, जो पिछले कुछ वर्षो से कम हो गया था। 56 वर्ष के बाद कुश्ती में पदक आना अपने आप में सुखद अनुभव है। यह कहना था सुशील के अखाडे़ के कोच यशबीर का। उन्होंने कहा कि सुशील जब छत्रसाल अखाड़े पर आए उस दौरान उनकी उम्र मात्र 14 वर्ष थी। 25 वर्ष में उसने यह कमाल दिखाया, इससे साफ है कि इस पहलवान ने काफी मेहनत की होगी। यशबीर ने कहा कि देश को एक सुंदर मौका मिला है। सुशील के पदक से कुश्ती को अपनी पहचान फिर से मिलेगी। पूर्व ओलंपियन एसएस दहिया ने कहा कि बुधवार का दिन भारत के लिए गौरवशाली रहा। उनकी खेल बिरादरी में एक नया पहलवान शामिल हुआ है। 1952 के बाद एक पदक आने के लिए हमारे देशवासी तरस गए थे। हालांकि इसमें कई तकनीकी काम भी शामिल है, पर सुशील ने सतपाल पहलवान या छत्रसाल अखाडे़ का ही नहीं, पूरे देश में पहलवानों का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया। सुशील के पदक से अब हमारे लिए ओलंपिक के दरवाजे खुले हैं। इसको शुरुआत माना जा सकता है। यह युवाओं को इस खेल की तरफ मोड़ने का काम करेगा। अंतरराष्ट्रीय पहलवान रोशन लाल ने कहा कि केडी जाधव के दौरान की कुश्ती और आज की कुश्ती में काफी अंतर आ चुका है। कई नियम बदल गए हैं। इन सभी को झुठलाते हुए सुनील ने जो कर दिखाया उससे पहलवानों का सिर गर्व से ऊंचा हो गया। 2007 का द्रोणाचार्य पुरस्कार पाने वाले ओलंपियन जगमिंदर ने कहा कि यह दिन कुश्ती इतिहास में हमेशा याद रहेगा। जाधव के बाद हमें ओलंपिक पदक पाने के लिए जरूर 56 वर्ष लग गए हो, पर अब यह वनवास खत्म हो चुका है। इस जीत के पीछे उसकी शानदार फिटनेस का भी कमाल है। जगत पहलवान ने कहा कि पहलवान अपना परिवार व शरीर तोड़कर बनता है। उसको हमेशा ही पैसे की कमी खलती है, दूसरे खेलों के खिलाड़ियों को प्रायोजक मिलते रहते हैं पर कुश्ती में ऐसा न के बराबर है। सुशील का पदक कार्पोरेट जगत को भी सोचने को मजबूर करेगा।
उधर, ओलंपिक के इतिहास में भारत के लिए मुक्केबाजी में पहला पदक सुनिश्चित करने वाले तेजतर्रार मुक्केबाज विजेंदर ने सात साल पहले 2001 में जर्मनी में सब जूनियर इंटरनेशनल चैंपियनशिप का स्वर्ण जीतकर ओलंपिक पदक के अपने अभियान की शुरुआत कर दी थी। बीजिंग ओलंपिक के 75 किग्रा भार वर्ग के क्वार्टर फाइनल में इक्वाडोर के मुक्केबाज कार्लोस गोंगोरा को अंकों के आधार पर 9-4 से हराकर सेमीफाइनल में प्रवेश करने वाले विजेंदर ने कम से कम कांस्य पदक मिला सुनिश्चित कर लिया है। हरियाणा रोडवेज के ड्राइवर महिपाल सिंह के यहां 29 अक्तूबर 1985 को जन्में विजेंदर ने मात्र 16 साल की उम्र में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वर्ण पदक जीतकर अपनी काबीलियत साबित कर दी थी। भिवानी के इस मुक्केबाज को इसके बाद अपने कौशल को निखारने के लिए अपने परिवार से दूर रहना पड़ा और पिछले आठ साल में उनका अधिकतर समय चैंपियनशिप में खेलते हुए या शिविर में ही बीता। विजेंदर के पिता ने कहा कि हम आठ साल से अपने बच्चे से अच्छी तरह नहीं मिल पाएं हैं। अधिकतर उससे फोन पर ही बात होती है। उन्होंने कहा कि हम तो सीधे सादे लोग हैं। मैं ड्राइवरी करता हूं और विजेंदर की मां आज भी गाय भैंस चराने जाती है। विजेंदर ने हमें पहचान दिलाई है। टीवी और मीडिया वाले हमारे घर के बाहर खड़े हैं। मैंने तो सपने में भी नहीं सोचा था कि टीवी पर नजर आऊंगा।
source: www.in.jagarn.com